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पीलिया और अनà¥à¤¯ मौसमी बीमारियों से बचने के लिठफॉलो करें ये डाइट चारà¥à¤Ÿ
शहर में पीलिया सहित अनà¥à¤¯ मौसमी बीमारियां तेज३ी से फैल रही हैं। आमतौर पर ये बीमारियां दूषित पानी या à¤à¥‹à¤œà¤¨ से होती हैं। सही तरीके से खानपान को रà¥à¤Ÿà¥€à¤¨ लाइफ में शामिल किया जाठतो इनसे बचा जा सकता है। इसके लिठपहले जहां लोग सà¥à¤¨à¥€-सà¥à¤¨à¤¾à¤ˆ डाइट फॉलो कर रहे थे, वहीं अब कई लोग डायटीशियन की सलाह से डाइट चारà¥à¤Ÿ पà¥à¤²à¤¾à¤¨ करवा रहे हैं। आप à¤à¥€ जानिठइस मौसम में कà¥à¤¯à¤¾ खाà¤à¤‚ और कà¥à¤¯à¤¾ नहीं।
à¤à¤¸à¤¾ हो डाइट चारà¥à¤Ÿ
सà¥à¤¬à¤¹ नींबू वाला गà¥à¤¨à¤—à¥à¤¨à¤¾ पानी पीà¤à¤‚। गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी के साथ बिसà¥à¤•िट लें। नाशà¥à¤¤à¤¾ में दलिया, पोहा, उपमा, ओट ले सकते हैं। पकौड़ा और तली चीजें अवॉइड करें। नाशà¥à¤¤à¤¾ और लंच के बीच जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ गैप न करें। खाने में à¤à¥€ दाल, रोटी, सबà¥à¤œà¥€, चावल, सलाद शामिल करें। इस दौरान दही का बना छाछ और आम का पना पी सकते हैं। 5 बजे के आसपास नारियल पानी, शेक, गà¥à¤°à¥€à¤¨ टी, सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤‰à¤Ÿà¥à¤¸ ले सकते हैं। रात में हलà¥à¤•ी डाइट लें। इसमें खिचड़ी, चावल, रोटी, दाल, सबà¥à¤œà¥€ और दूध के पà¥à¤°à¥‹à¤¡à¤•à¥à¤Ÿ लें।
अगर बाहर खाना पड़े तो ये लें
कà¤à¥€-कà¤à¥€ पारà¥à¤Ÿà¥€ में या होटल में à¤à¥€ बà¥à¤°à¥‡à¤•फासà¥à¤Ÿ, लंच या डिनर करना पड़ता हैं। इस दौरान धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखें कि तली हà¥à¤ˆ चीजें न खाà¤à¤‚। बाहर का जूस, शरबत, गनà¥à¤¨à¤¾ रस, गà¥à¤ªà¤šà¥à¤ª, चाट टिकिया, बरà¥à¤« का गोला और अनपैकà¥à¤¡ आइसकà¥à¤°à¥€à¤® न खाà¤à¤‚। तà¥à¤°à¤‚त बन कर परोसा जा रहा खाना जैसे तंदूरी रोटी, तवा सबà¥à¤œà¥€ को ही पà¥à¤°à¤¾à¤¥à¤®à¤¿à¤•ता दें।
पीलिया है तो यह à¤à¥‹à¤œà¤¨ है आपके लिठबेसà¥à¤Ÿ
पीलिया पीडि़त को अकà¥à¤¸à¤° उबला खाना दिया जाता है, जिसे मॉडरà¥à¤¨ जमाने में पेशेंट कà¥à¤¯à¤¾ कोई à¤à¥€ खाना पसंद नहीं करता। पीलिया ठीक होने के लंबे समय तक पेशेंट को वीकनेस की समसà¥à¤¯à¤¾ रहती है। पीलिया पेशेंट को बिना हलà¥à¤¦à¥€ और तेल का à¤à¥‹à¤œà¤¨ दिया जाता है, जो गलत है। आहार विशेषजà¥à¤ž सà¥à¤®à¥ƒà¤¤à¤¿ वाजपेयी के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° पीलिया पीडि़तों को पतली दाल, हरी पतà¥à¤¤à¥‡à¤¦à¤¾à¤° सबà¥à¤œà¥€, रोटी, चावल दिया जा सकता है। इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ साफ-सà¥à¤¥à¤°à¤¾ गनà¥à¤¨à¤¾ चूसने के लिठदेना चाहिà¤à¥¤ अगर पीलिया पीडि़त शà¥à¤—र पेशेंट नहीं है तो खाने में गà¥à¤¡à¤¼ दें। गà¥à¤¡à¤¼ में शà¥à¤—र और आयरन होता है। मौसमी फल और जूस दें। खाली पेट लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ न दें, बलà¥à¤•ि कà¥à¤› सॉलिड खाने के बाद ही लिकà¥à¤µà¤¿à¤¡ दें, वरना पेट दरà¥à¤¦ और उलà¥à¤Ÿà¥€ की शिकायत होगी। हर तरह के मौसमी फल के साथ पपीता, केला दें। सबà¥à¤œà¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ को उबालकर थोड़ी मातà¥à¤°à¤¾ में तेल में तड़का लगाकर और अचà¥à¤›à¥‡ से पकाकर दें।इनसे बचें
ये खाà¤à¤‚
ञà¥à¤š अचà¥à¤›à¥€ तरह पका हà¥à¤† घर का à¤à¥‹à¤œà¤¨ खाà¤à¤‚।
ञà¥à¤šà¤¦à¤¿à¤¨à¤à¤° में ढाई से तीन लीटर पानी पीà¤à¤‚।
ञà¥à¤šà¤²à¤¿à¤•à¥à¤µà¤¿à¤¡ आयटम में पानी के अलावा छाछ, मठा और जूस शामिल करें।
ञà¥à¤šà¤¦à¤¿à¤¨à¤à¤° में 100 गà¥à¤°à¤¾à¤® मौसमी फल लें।
ञà¥à¤šà¤¨à¥€à¤‚बू पानी अधिक से अधिक पीà¤à¤‚।
ञà¥à¤š फà¥à¤°à¤¾à¤ˆ और मसालेदार à¤à¥‹à¤œà¤¨ से परहेज करें।
ञà¥à¤š लसà¥à¤¸à¥€ से बचें। इसमें बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ शकà¥à¤•र होती है, जो सेहत के लिठहानिकारक है।
ञà¥à¤š बासी à¤à¥‹à¤œà¤¨ कतई न खाà¤à¤‚।
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